छिबरामऊ | 18-Aug-2025 | Reporting by : Naveen Kumar | Chhibramau.in न्यूज़
अगस्त का महीना छिबरामऊ और आसपास के इलाकों में चोरी की घटनाओं के लिए जैसे बदनाम होता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में कई छोटे-बड़े इलाकों से चोरियों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। खासकर छिबरामऊ नगर में बीते दो-तीन दिनों से चोरी की वारदातें इतनी बढ़ गई हैं कि लोग अब अपने घरों और दुकानों की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

इंद्रा आवास कॉलोनी में मची हलचल
हाल ही के दिनों में सबसे ज्यादा सुर्खियाँ छिबरामऊ की इंद्रा आवास कॉलोनी से आईं। कॉलोनी के लोगों ने दो संदिग्ध चोरों को इलाके में घूमते हुए देखा। जैसे ही यह खबर फैली, लोग घरों से बाहर निकल आए और चोरों को पकड़ने की कोशिश करने लगे। लेकिन चोर इतने चालाक निकले कि भीड़ जुटने से पहले ही अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले।
गली-गली में लोग टॉर्च लेकर चोरों को ढूंढते रहे, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इस घटना के बाद से ही कॉलोनी के लोग और भी ज्यादा डरे हुए हैं।
लोगों की नींद उड़ी, रातें जागकर काटनी पड़ रही हैं
चोरी की घटनाओं के डर ने लोगों का सुकून छीन लिया है। अब हालात यह हैं कि कई परिवार रातभर जागकर पहरा देते हैं। खासकर बुजुर्ग और महिलाएँ घर के बाहर आती-जाती आहट पर चौकन्नी रहती हैं।
एक स्थानीय निवासी ने बातचीत में बताया,
“रात को नींद ही नहीं आती। थोड़ी सी खटपट सुनाई दे तो लगता है कोई घर में घुस आया है। बच्चे भी डर के मारे खामोश रहते हैं।”
बढ़ी टॉर्च और सीसीटीवी कैमरों की बिक्री
जब डर बढ़ता है तो सुरक्षा के इंतजाम भी तेज़ी से बढ़ जाते हैं। यही कारण है कि इन दिनों छिबरामऊ के इलेक्ट्रिकल दुकानदारों की बिक्री अचानक बढ़ गई है।
टॉर्च, इमरजेंसी लाइट और खासकर सीसीटीवी कैमरे तेजी से बिक रहे हैं। कई दुकानदारों ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में इन सामानों की बिक्री दोगुनी हो गई है। लोग अब अपने घरों और दुकानों को तकनीक के सहारे सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
छोटे बच्चों और महिलाओं में डर का माहौल
चोरी की वारदातों का असर सबसे ज्यादा घर की महिलाओं और बच्चों पर दिखाई दे रहा है। बच्चे रात को बाहर खेलने जाने से डरते हैं और महिलाएँ शाम ढलते ही घर का दरवाजा बंद कर लेती हैं।
इंद्रा आवास कॉलोनी की एक महिला ने बताया,
“पहले हम रात को देर तक छत पर बैठते थे, लेकिन अब डर के कारण अंधेरा होते ही दरवाजे बंद कर देते हैं। हर वक्त मन में यही डर रहता है कि कहीं चोर फिर से न आ जाएं।”
लोगों ने खुद बनाई चौकसी की टीम
चोरियों से परेशान होकर अब लोग खुद ही चौकसी करने लगे हैं। कॉलोनी और मोहल्लों में स्थानीय युवाओं ने रात में गश्त करने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली है।
गली-गली में चार-पाँच लोगों के समूह टॉर्च और डंडा लेकर पहरा देते दिखाई देते हैं। कहीं-कहीं पर तो लोगों ने आपस में सीटी और डंडे का भी इंतजाम कर रखा है, ताकि कोई संदिग्ध दिखे तो तुरंत सभी इकट्ठा हो जाएं।
वास्तविक जीवन की मिसाल
पिछले साल भी अगस्त के महीने में पास के ही एक गाँव में इसी तरह की चोरी की वारदातें बढ़ गई थीं। उस समय भी लोग रात में जागकर पहरा देते थे। बाद में जब कुछ चोर पकड़े गए तो पता चला कि वे आसपास के ही इलाके के थे, जो मौका देखकर छोटे-मोटे घरों में हाथ साफ करते थे।
लोग अब अंदेशा जता रहे हैं कि इस बार भी कहीं वही हालात न दोहराए जा रहे हों।
आखिर ये चोर कौन हैं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये चोर (Chhibramau ke Indra awas colony mein dikhe chor) कौन हैं और कहाँ छिपे हुए हैं?
क्या वे बाहर से आए हैं या फिर इलाके के ही लोग हैं?
क्या वे किसी गिरोह से जुड़े हैं या अकेले काम कर रहे हैं?
इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। लेकिन इतना तय है कि जब तक चोर पकड़े नहीं जाते, तब तक छिबरामऊ और आसपास के लोग चैन की नींद नहीं सो पाएंगे।