छिबरामऊ | 22-April-2025 | Reporting by : Naveen Kumar | Chhibramau.in न्यूज़
“कभी-कभी एक छोटी सी लापरवाही पूरे सिस्टम की पोल खोल देती है।”
छिबरामऊ में कुछ ऐसा ही हुआ, जब एक 15 साल की मासूम लड़की की नर्सिंग होम में इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई और उसके बाद शुरू हुआ एक ऐसा बवाल (Chhibramau Kotwali prabhari suspended), जिसने पुलिस महकमे में बड़ी उथल-पुथल मचा दी।

रुचि की मौत से शुरू हुआ तूफान
घटना रविवार की है, जब छिबरामऊ के एक प्राइवेट नर्सिंग होम – कृष्णा हॉस्पिटल – में 15 वर्षीय रुचि गुप्ता को बुखार और कमजोरी की शिकायत पर भर्ती कराया गया। परिवार को लगा था कि कुछ इंजेक्शन लगवाने के बाद बच्ची ठीक हो जाएगी। मगर हुआ कुछ और।
डॉक्टर ने जो इंजेक्शन दिया, उससे थोड़ी देर बाद ही रुचि की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि नर्सिंग होम ने गलत इंजेक्शन लगाया था और फिर बचाने की बजाय लापरवाही दिखाई।
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हॉस्पिटल से लेकर सड़कों तक फैला गुस्सा
रुचि की मौत के बाद जैसे ही परिवार ने नर्सिंग होम में विरोध शुरू किया, खबर आग की तरह फैल गई।
सोमवार और मंगलवार, दो दिन तक छिबरामऊ की गलियों में आक्रोश की लहर दौड़ती रही। जगह-जगह पर प्रदर्शन, रोड जाम और फिर… पुलिस का लाठीचार्ज।
सोचिए, एक तरफ बेटी को खो चुका परिवार था, जो न्याय मांग रहा था, और दूसरी ओर पुलिस की लाठियों से पिटते लोग। भीड़ के बीच छोटे बच्चे, महिलाएं – सबकुछ एक दर्दनाक मंजर जैसा लग रहा था।
कौन है जिम्मेदार? पुलिस की लापरवाही या सिस्टम की साजिश?
अब सवाल ये था कि जब शहर का माहौल इतना संवेदनशील था, तब पुलिस ने लाठीचार्ज जैसे कदम क्यों उठाए?
छिबरामऊ कोतवाली के प्रभारी अजय कुमार अवस्थी और निरीक्षक राजेश कुमार तिवारी (Chhibramau Kotwali prabhari suspended) पर आरोप लगा कि उन्होंने हालात को सही से नहीं संभाला, न तो प्रदर्शन को सही दिशा दी, न ही परिजनों की शिकायत को गंभीरता से लिया। उल्टा लाठीचार्ज कर माहौल और बिगाड़ दिया।
एसपी विनोद कुमार ने तुरंत एक्शन लेते हुए दोनों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया और कहा कि –
“कानून व्यवस्था में कोई भी चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
किसे मिला कौन-सा नया चार्ज? फेरबदल की बड़ी लिस्ट आई सामने
अब क्योंकि कोतवाली प्रभारी हटाया गया था, तो जरूरी था कि नए अधिकारियों की तैनाती की जाए।
एसपी ने रातों-रात पांच बड़े फेरबदल किए:
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अजय कुमार अवस्थी को क्राइम ब्रांच में भेजा गया
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चंद्र प्रकाश तिवारी को पुलिस लाइन
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छिबरामऊ कोतवाली का चार्ज अब सौरिख थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी को
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सौरिख थाना का चार्ज विशुनगढ़ थाना प्रभारी दिनेश कुमार को
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और एसपी पीआरओ गौरव कुमार को विशुनगढ़ थाने का जिम्मा दिया गया
यह कोई आम तबादला नहीं था, ये एक बड़ा संदेश था – कि अगर लापरवाही की, तो कुर्सी जाएगी।
राजनीतिक दबाव भी आया सामने, मंत्री के आदेश पर हुई गिरफ्तारी
इस पूरे मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने खुद मामले में दखल दिया।
उनके आदेश पर हॉस्पिटल संचालक वैभव दुबे और कंपाउंडर को गिरफ्तार कर लिया गया।
जिलाधिकारी ने भी मामले को गंभीर मानते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह पता चल सके कि क्या वाकई इंजेक्शन गलत था या कोई और वजह थी?
परिवार की चीख-पुकार और टूटे हुए सपने
रुचि गुप्ता के पिता की आंखों में अब भी वो रात ताजा है, जब बेटी उनके सामने तड़प रही थी और डॉक्टर सिर्फ “देखते” रह गए। उन्होंने मीडिया से कहा:
“हमें इंसाफ चाहिए। हमारी बच्ची गई है, लेकिन कोई और बच्ची ऐसी लापरवाही की भेंट न चढ़े।”
क्या सबक लेगा सिस्टम?
यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी नर्सिंग होम की लापरवाही पर किसी मासूम की जान गई हो।
छोटे शहरों में अक्सर बिना जांच के अस्पताल चलाए जाते हैं, बिना प्रशिक्षित स्टाफ के इलाज किया जाता है, और जब हादसा हो जाए – तो आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो जाता है।
इस बार फर्क ये है कि पब्लिक चुप नहीं रही, मीडिया ने आवाज उठाई, और प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
छिबरामऊ में क्या बदलेगा अब?
पुलिस महकमे में फेरबदल से कुछ हद तक यह संदेश जरूर गया है कि लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
मगर सवाल यह है कि क्या इससे रुचि जैसी बच्चियों की जान बच पाएगी? क्या हर केस में ऐसे ही कार्रवाई होगी?
आखिरी बात – ये कहानी सिर्फ छिबरामऊ की नहीं है…
ये कहानी है हर उस शहर की, जहां आज भी लोग इलाज के नाम पर लूटे जाते हैं, जहां लापरवाह डॉक्टर अपनी कुर्सी से चिपके रहते हैं और जहां “सिस्टम” की गलती का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है।
लेकिन उम्मीद अब भी बाकी है – क्योंकि जब जनता जागती है, तो सिस्टम को भी झुकना पड़ता है।





