उत्तर प्रदेश का छिबरामऊ नगर न केवल व्यापार और शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका प्रशासनिक इतिहास भी बेहद गौरवशाली रहा है। छिबरामऊ नगर पालिका (Chhibramau Nagar Palika) की स्थापना का सफर ब्रिटिश काल से शुरू होकर आजादी के बाद लोकतंत्र की नींव तक फैला हुआ है।
17 जुलाई 1860 को छिबरामऊ नगर समिति (टाउन एरिया) का गठन किया था (History of Chhibramau)
अंग्रेजों ने 163 साल पहले बनाई थी छिबरामऊ टाउन एरिया
| → तब इसे नगर समिति कहा जाता था |
| → 1971 में हुआ था नगरपालिका का गठन |
| → Nagar Palika Parishad Chhibramau |
ब्रिटिश शासन में टाउन एरिया का गठन
अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति के बाद भारत में अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए नई प्रशासनिक व्यवस्थाएं लागू कीं। इसी कड़ी में 17 जुलाई 1860 को छिबरामऊ टाउन एरिया (Chhibramau Town Area Committee) का गठन किया गया। उस समय छिबरामऊ, फर्रुखाबाद जिले का हिस्सा था। इसी दौरान तिर्वा, तालग्राम और शमसाबाद जैसे कस्बों में भी नगर समितियां बनीं।
अंग्रेजों का मकसद था कि तहसील, थाना और टाउन एरिया जैसी संस्थाओं के जरिए स्थानीय लोगों की गतिविधियों पर नज़र रखी जाए और स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारियों को दबाया जा सके।
छिबरामऊ नगर समिति और पहले चेयरमैन
इतिहास के अनुसार, ब्रिटिश काल में वर्ष 1920 में छिबरामऊ नगर समिति को औपचारिक रूप से टाउन एरिया का दर्जा मिला। इसके बाद चुनाव कराए गए और बनवारी लाल दुबे पहले चेयरमैन चुने गए।
उनके बाद रघुवर दयाल दुबे, फिर रामशंकर दुबे उर्फ मुख्तियार साहब ने नेतृत्व किया। इसके बाद छिबरामऊ को डॉ. जगदीश्वर दयाल अग्निहोत्री (डॉ. मन्त्रा) जैसे चेयरमैन मिले, जिन्होंने लगातार तीन कार्यकाल तक जनता की सेवा की।
पहली पेयजल योजना – एक ऐतिहासिक कदम
छिबरामऊ टाउन एरिया (Chhibramau Town Area) में विकास की बड़ी उपलब्धि वर्ष 1966 में मिली। उस समय चेयरमैन डॉ. जगदीश्वर दयाल अग्निहोत्री ने 9 जनवरी 1966 को टाउन एरिया परिसर में बनी टंकी का लोकार्पण कर प्रथम पेयजल योजना की शुरुआत की। इस योजना से छिबरामऊ के लोगों को पहली बार संगठित पेयजल सुविधा मिली।
नगर पालिका का दर्जा (Chhibramau Nagar Palika Establishment)
वर्ष 1971 में छिबरामऊ टाउन एरिया को उच्चीकृत कर दिया गया और इसे छिबरामऊ नगर पालिका (Chhibramau Nagar Palika) घोषित किया गया। इस दौरान चेयरमैन बने सैयद अनवार जमील उर्फ जिमी मियां।
हालांकि 1977 से 1990 तक नगर पालिका सीट सुपर सीट रही और चुनाव नहीं हो सके। इस बीच 31 जुलाई 1986 को छिबरामऊ नगर पालिका की सीमा का विस्तार कर ग्राम पंचायत बहवलपुर को इसमें शामिल कर लिया गया।
छिबरामऊ नगर पालिका में चुनावी इतिहास
-
1990: 13 साल बाद चुनाव हुए और बृजेश गुप्ता चेयरमैन बने।
-
1995 से 2005: लगातार दो कार्यकाल तक बृजेश गुप्ता ने नगर का नेतृत्व किया।
-
2007: महिला सीट होने पर पूर्व चेयरमैन सैयद अनवार जमील की पुत्रवधू सुभाना रफी ने जीत दर्ज की।
-
2012: महिला आरक्षित सीट होने पर आदेश गुप्ता (पत्नी बृजेश गुप्ता) चेयरमैन बनीं।
-
2017: पहली बार भाजपा (BJP) ने छिबरामऊ नगर पालिका में जीत दर्ज की और राजीव दुबे चेयरमैन बने।
-
2023: सामान्य सीट होने पर एक बार फिर भाजपा ने विजय हासिल की और मनोज दुबे को चेयरमैन चुना गया।
छिबरामऊ नगर पालिका का महत्व
आज छिबरामऊ नगर पालिका न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि नगर के विकास कार्यों, पेयजल व्यवस्था, सफाई अभियान, सड़क निर्माण और बिजली व्यवस्था को संभालने में इसकी प्रमुख भूमिका है। टाउन एरिया से शुरू हुई यह यात्रा अब आधुनिक नगर पालिका के रूप में बदल चुकी है। छिबरामऊ नगर पालिका का इतिहास (Chhibramau Nagar Palika History) इस कस्बे के गौरव और संघर्ष को दर्शाता है। अंग्रेजों द्वारा बनाई गई टाउन एरिया व्यवस्था आज स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। छिबरामऊ नगर पालिका ने अपने शताब्दी से भी लंबी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन हर दौर में यह नगरवासियों की सेवा और विकास की दिशा में अग्रसर रही है।
