नगला समद में शिखा ने जहर खाकर दी जान

छिबरामऊ | 23-May-2025 | Reporting by : Naveen Kumar | Chhibramau.in न्यूज़

सौरिख थाना क्षेत्र के नगला समद गांव में एक ऐसी घटना घटी जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर (sikha ne khaya jaher chhibramau news) कर दिया। 28 वर्षीय शिखा, एक साधारण गृहिणी, एक मासूम बच्चे की मां और महज तीन साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद अचानक इस दुनिया को अलविदा कह गई। बताया जा रहा है कि घरेलू विवाद के बाद उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी।

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इस खबर ने सिर्फ नगला समद ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। लोग यह सोचने को मजबूर हो गए कि आखिर ऐसा क्या हुआ होगा जो एक महिला ने ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया।

घरेलू कलह से शुरू हुआ सब कुछ

घटना की शुरुआत एक मामूली घरेलू विवाद से हुई। शिखा के पति रामपाल ने बताया कि बच्चों को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई थी। ये बहस कोई नई बात नहीं थी, हर घर में कभी न कभी ऐसी बहसें होती हैं। लेकिन इस बार बात कुछ ज्यादा बढ़ गई।

रामपाल के मुताबिक, उसने गुस्से में शिखा को डांट दिया था। उस समय शायद किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि शिखा इस डांट को इतनी गंभीरता से ले लेगी।

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कमरे में बंद होकर खा लिया जहर

डांट के बाद शिखा गुस्से में कमरे में चली गई। किसी को यह नहीं पता था कि वह अंदर क्या कर रही है। थोड़ी देर बाद जब आवाज नहीं आई, तो परिजनों को शक हुआ। दरवाजा तोड़ा गया और अंदर का मंजर देखकर सबके होश उड़ गए।

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शिखा बेहोश पड़ी थी, और उसके पास ही कोई जहरीला पदार्थ पड़ा हुआ था (sikha ne khaya jaher chhibramau news) । परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर उसे सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

तीन साल की शादी और एक मासूम बेटा

शिखा की शादी तीन साल पहले रामपाल से हुई थी। शादीशुदा जिंदगी सामान्य चल रही थी, लेकिन जैसा कि हर रिश्ते में होता है, कुछ कहासुनी हो जाया करती थी। उनके एक तीन साल का बेटा है, जिसका नाम आरू है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिखा ने अपने बेटे के बारे में नहीं सोचा? आखिर क्यों उसने ऐसा कदम उठाया?

गांव में पसरा सन्नाटा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

घटना के बाद गांव में सन्नाटा छा गया है। जो भी यह खबर सुनता है, वहीं रुक जाता है। शिखा की मौत ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां-बाप का कहना है कि शिखा बहुत समझदार और शांत स्वभाव की थी। उसने कभी भी कोई शिकायत नहीं की थी। लेकिन आज उसने कुछ ऐसा कर दिया जिससे सबको गहरा झटका लगा है।

क्या सिर्फ डांट की वजह से हुई मौत?

अब असली सवाल यही है कि क्या सिर्फ डांट की वजह से शिखा ने इतना बड़ा कदम उठा लिया? या फिर इसके पीछे कोई और गहरी वजह थी?

पुलिस मामले की जांच में जुटी है। गांव वालों का कहना है कि हो सकता है कि घरेलू हिंसा या दिमागी तनाव का मामला रहा हो, जिसकी जानकारी किसी को न हो। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ साफ हो सकेगा।

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ऐसे मामलों पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं लोग?

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में ऐसे मामले कितनी बार सामने आते हैं, और कितने बार लोग चुपचाप उन्हें सहते रहते हैं।

कई बार महिलाएं घरेलू तनाव को बर्दाश्त करती रहती हैं और बाहर किसी को कुछ नहीं बतातीं। धीरे-धीरे वो तनाव अंदर ही अंदर जहर बन जाता है और फिर एक दिन ऐसा कदम उठाने को मजबूर कर देता है।

एक और मासूम जिंदगी सवालों में उलझ गई

शिखा की मौत के बाद अब उसका बेटा आरू सवालों के घेरे में है। एक मासूम बच्चा, जिसे अभी ठीक से बोलना भी नहीं आता, वो अपनी मां को हमेशा के लिए खो चुका है।

कौन उसकी मां की कमी को पूरा करेगा? कौन उसे समझाएगा कि उसकी मां क्यों नहीं रही? ये सवाल सिर्फ आरू के नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज के हैं।

क्या कहती हैं कानून व्यवस्था और समाजशास्त्री?

कानूनी रूप से देखा जाए तो आत्महत्या एक गंभीर मामला है। खासकर तब, जब उसके पीछे किसी और की मानसिक प्रताड़ना का शक हो। पुलिस इसे सुसाइड केस मानकर जांच कर रही है, लेकिन अगर इसमें घरेलू हिंसा के कोई सबूत मिले, तो मामला और भी गंभीर हो सकता है।

समाजशास्त्री मानते हैं कि महिलाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत है। साथ ही, परिवारों में संवाद और समझ का होना बेहद जरूरी है। अगर शिखा के पास कोई ऐसा होता जिससे वह अपने दिल की बात कह पाती, तो शायद आज वह जिंदा होती।

कब जागेगा समाज?

शिखा की मौत एक और दुखद उदाहरण है उस समाज का, जहां भावनाएं दबा दी जाती हैं, जहां औरतें चुप रह जाती हैं, जहां बच्चों के झगड़े से शुरू हुआ विवाद मौत तक पहुंच जाता है।

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अब वक्त आ गया है कि हम सब जागें। रिश्तों में संवाद को बढ़ावा दें। किसी को जब गुस्सा आए, तो उस पर गहराई से बात करें। छोटी-छोटी बातों को हल्के में न लें, क्योंकि किसी के लिए वही बातें ज़िंदगी और मौत का कारण बन सकती हैं।


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